Tuesday, July 5, 2016

ख्वाहिश

सुनो ,कभी उन ख्वाहिशो
को पानी दो,जो अभी तक
जन्मी नहीं और कभी उनका
जो तुम्हारी साँसो में कही
छुपी हैं तुम में रेंगती हैं
कहीं तुम मे ठहर जाती हैं
और कभी कुछ छूटने
पर छम से टूटकर
तुम ही तोड जाती हैं

ख्वाहिश हैं मेरी ,ख्वाहिशो को
थोड़ा - थोड़ा सजा दो, उस पार
खड़ा मन ,अभी इन्तजार में हैं उसके

Friday, April 22, 2016

सपने में कई रंग भरे हैं

तेरी गलियो को छोड़ ,मैं अब उस जगह खड़ी हूँ,
जहाँ न तेरा दर है न कोई गली
अंधेरे का टुकड़ा,मेरी छाया को समेटे
खड़ा हैं ,
मैने हथेली पर या और खुद को समेटकर
उस पहाड़ी पर चढ रही हूँ जहाँ से
बादलो में
छुपा सूरज अंधेरे
को खाकर ,
डकार मार
आसमान मे मुस्कराकर
ठहर जाता हैं
सपने में कई रंग भरे हैं smile emoticon

Tuesday, April 19, 2016

सागर सा शान्त

कभी कितना खूबसूरत सा लगता है
तन्हा रहना ,किसी से शिकवा नहीं
न ही उम्मिद, न रूठना,न मनाना
कई बार खुद का न होना भी
मुझे अपने भीतर तक भर देता है
मैं हर पल उत्सव मे हूँ
इसलिए नहीं कि मैंने कुछ
पा लिया,बल्कि इसलिए
कि खोना मेरे लिए आसान रहा
तुम्हे पाने से कहीं ज्यादा।
सुनो,मन कभी कभी बहुत
गहरे सागर सा शान्त बहता है

Thursday, April 7, 2016

दिल में ही कही हैं

कुछ किस्से कभी बयान नहीं
होते ,कुछ दर्द की जमीन
नहीं होती
धड़कने फिर भी दर्द के
धागे से ही सिली जाती हैं
सुन ,तू दिल में ही कही हैं बाकी

चमकते ठोस मोती

साँसे जब गुलाम होने के लिए तरस
रही थी और
बकरीयॉ घास चरकर इन्तजार
कर रही उस रात का ,जब सब
खत्म होने वाला हैं 
वो मन भी ,जो घास के कोरो पर
उगने लगता है,एक चमकती
ओस की बूंद की तरह..
वो गड़रिया भी ,जो रोज
बकरीयों को मन चराने
आता है और वो रात
भी जो ओस बनकर
घास की कोरो पर
ठहर जाती है
सब एक दिन खत्म
हो जाएगा ,शेष रह
जाँएगे,चमकते ठोस
मोती
घास की कोरो पर..