Friday, April 15, 2011

विश्वास

ना सीमाए हो ना दीवारे हो जीने के लिए .... बस एक हौसला चाहिए मुझे जीने के लिए .... तो क्या अगर पंख नहीं उड़ान के लिए...... मन का विश्वास चाहिए उस आसमान को छूने के लिए.... जिओ जिओ ऐसे जिओ जैसे आसमान को कोई शितिज नहीं ....... बस ज़रा सा हुन्नर चाहिए जीने के लिए ......

Tuesday, February 3, 2009

पोटली

ख्यालो की पोटली मेने
आज खोली है ........
आओ तुम भी आओ ,
मेरे ख्याल में आओ

दर्द को भी बुलाया मेने
हसी को भी लब पर
बिठाया मेने ..........

आसूऊं को आँख में .........
जगह देकर ...................
फिर थोडा गुनगुनाया ......

कभी तुम मेरा दामन पकड़ते
तो कभी दर्द......................... ,
कहने को तुम दोनो............
एक दूसरे से जुड़े हो.........
मगर फिर भी दोनो
को बुलाया मेने .......

दरवाजा घर का खोल
भरी दीवारो की सीलन
को सूखने छोड़ा .....

की महकी हवा ने
मेरी सांसो को गहरा किया
तब ठंडी सांसो को
भी बुलाया मेने......

बिस्तर तकिया सब
मेरे थोड़े थोड़े गीले-गीले
से है.............................
ख़यालो की पोटली शायद
पानी से भारी है ये पाया
........................मेंने

घर के कोने में कुछ पुरानी
सी महक है.......................
शायद कोई बरसो पुराना
रिश्ता सड़ गया था.....
उठाकर टटोला तो लगा
अभी उसमे में कुछ .....
ताज़गी बाकी सी........

ये सिर्फ़ ख्याल था मेरा
या घर की हवा उसे
कुछ ताज़ा सा कर गयी ....

आज पोटली खोल सारे
रिश्ते खोल दिए है .....
एक एक यादों के पुलिंदे
की गाँठे खोल दी है मेने

आसुओं में सब शे
को बहा दिया ..........

बस खुद को बचाकर ,
छुपाकर पोटली को
कही दूर फेंक दिया .......... मेने

में और पोटली का रिश्ता
तोड़ दिया है............. मेने

Tuesday, December 2, 2008

चुनाव / आतंकवादी

हुह... चुनाव ... या अपने देश के लिए एक घरेलु आतंकवादी को चुनने का नोयता

अगर हम इनको चुन भी लेते है तो क्या गेरन्त्ति है की वो अपनी सुरक्षा से ज्यादा हमारी
सुरक्षा की चिंता करेंगे ? क्या गेरन्त्ति है की ये वाकई तट की सुरक्षा करेंगे ? ख़ुद को वाकई
एक
चौकीदार समझेंगे .... देश का चौकीदार .... क्या ये तब जिमेदारी वाली बातें करेंगे ..
या
तभी देश का मजाक करते रहेंगे ...क्या ये यकीं दिला सकते है की वो वाकई हमारे देश के
लिए
, हमारे लिए जान देने को तैयार रहेंगे ????

या फिर यूँ कहंगे की "मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा है इन गोली बारी की बीच या फिर ये सब तो
हिन्दुस्तां में होता रहता है ... या फिर किसी शहीद के घर जाकर उनका अपमान करेंगे .....

क्यों वोट दे इन्हे ..... ताकि फिर इन्हे लोटेरों को मौका मिले अपनी माँ की इज्ज़ते के साथ खलेने का

हर बेटा अपनी माँ की आबरू को ढकता है मगर मेरे वतन के बच्चे , जो इनके रक्षक बने हुए है
वही भक्षक है॥

अगर आतंक हटाना है तो पहले इन नेताओ को हटाओ ॥ फिर से रंग दे बसंती चोला... के स्वरों को
असमान में लहारो दो ॥ हमे हमारी घर की सफाई करनी है ॥ कचरा बहुत भर गया है झाडो हर किसी को
उठानी है फिर से देश के लिए जान देने के लिए तैयार हो जाओ......

मार डालो इस आतंक को जिसके वजह से आतंकवादी हमारे घर में आ बेठे है ... मार डालो इन सबको..
जिन्हें
ख़ुद से ज्यादा किसी से प्यार नहीं , जिनके लिए जनता का मतलब सिर्फ़ पैसा और कुछ नहीं..,....

Wednesday, November 26, 2008

उधार

बहुत दिनों से दर्द मिला नहीं कही से,
की कोई नज़्म भी बनती नहीं
सोचा तुझसे बात कर .....
थोड़ा दर्द उधार ले लो..........

खयालो में तुझसे मिल मिल कर थक चली थी
खुदा भी बड़ा मेहरबान हो चला है मुझ पर ...
आंखों को नमी की जरूरत लगी ...
सोचा थोड़े आँसू .........
तुमसे उधार ले लो...

रोज़ रोज़ हँसना मेरी तकदीर हो गई
की सिने में अब जलन नहीं होती....
जलन मिल सके इसलिए करीब आई ...
तुझे जला कर सोचा जलन .......
थोडी उधार ले लो .....

शुक्र है तुमने मुझे देख फिर मुंह फेर लिया
की बीन बोले ही सारा काम कर दिया ...
बस अब तेरी उधार दी नज़्म को किसी कागज़ पर
उतार दू............
शुक्रिया शुक्रिया .........

Saturday, October 11, 2008

ख्वाब

मेरा मन करता है.....
में उड़ जाओ सफेद पर्वतो में
जहाँ श्वेत झरने बहते हो...
जहाँ व्रक्ष मधुर ध्वनि में कुछ
बातें करते हो.........
उनका स्पर्श कुछ कहता हुआ
जाए कानो मे मेरे ...

जहाँ पास की बस्ती में
कही छोटी से झोपड़ी
मेरा घर हो.......
आँगन में हक़ीक़त के मासूम
फूल खिले हो.....
दिल में बस .....
प्यारी धड़कने हो....


सड़क जो गुज़रे कही मेरे
घर से वो सबको मंज़िल
तक ले जाए .......
जो भटक जाए तो
उसे वो रास्ता बतलाए .....

चाय की चुस्की मेरा किसी
पड़ोसी के साथ इस विश्वास से
की में और वो बस एक इंसान है
मज़हब तो खुदा तक जाने का
ईक अंदाज़ है .......

मेरी झोपड़ी मे खिलखलाहट हो
पैसा कम हो ,मगर आँखों में
खुशी की चमक हो....

दूर जो कोई मेरा दोस्त हो
उसकी खेरियत की खबर
हवाएँ आकर दे ....

खून सबका लाल है
इसको आज़माने के लिए
कही बंब बालस्ट ना हो...

कही मेरा ऐसा छोटा सा
घर हो ..
जो बहता झरने के पास
और रहता कही दिल में
हो....................