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Monday, November 2, 2015

शब्दो का जायका

कुछ पक्के रंग ,शब्दो के, जायका बन
जुबान पर बरसो तक ,ठहरे रहते हैंं
रंगरेज से कहो ,जुबान चाशनी से धोये

Thursday, October 15, 2015

बुद्ध

प्यार ,किफायत वक्त की जरूरत हैं
मसरूफियत बुद्ध गढती हैं
बुद्ध को प्यार हुआ़...कहानी थी, पगली

Tuesday, May 12, 2015

मां

किसी काफिर ने कहा ,नासि्तक हूं मैं
खुदा मेरे बगल मे आ बैठा , मां
जब तेरे पैरो को छुआ मैनें

Friday, March 27, 2015

आडी - टेडी लिकरो की तस्वीर

निजी सामान को खुला नहीं छोडते
निजी मन की बात यू ही नहीं करते
बोल री कवीता,अब कहॉ गफ्तगूु की जाये

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टूटे हैं रिशतोे के धागे
कहॉ चला अब तू,सुई -धागा लेके
दर्जी क्या ,अब कुछ नहीं सिता ?


 

Tuesday, September 16, 2014

प्रेम

कुम्हार मटका गडते हुए कुछ
कह रहा था, तुमने सुना नहीं

प्रेम धीमी आँच पर छोड़
दो

Monday, August 4, 2014

रंगीन तस्वीरे

अंदर लगी अर्ध नग्न तस्वीरे बाहर
खड़ी औरतो को खारीज़ करती है

आँखों में  रंगीन तस्वीरे ठहरी है सबके

Sunday, October 6, 2013

सौगात

ता-उम्र एक ही बात कहता रहा
प्यार नहीं उसको मुझसे

सौगात में, उम्र किश्तो में देता रहा मुझको..

Thursday, April 11, 2013

कुछ लकीरो में तुम्हे ढूँढा,फिर
कुछ पन्नो पर लकीरे बना दी

कोई कहानी नहीं बनती लकीरो के बिना...

Sunday, May 20, 2012

ज़िंदगी,चन्द टेडी मेडी लहरे
बनकर हाथो में सिमटती है

समुंदर हथेली भर का .....

Friday, April 27, 2012

आजकल लेन देन हमने बंद कर दिया है

न वो आते है न ही खत लिखते है
हमने भी उनका इंतज़ार छोड़ दिया है
 
कितने है रंग हर चहरे पर
एक छुपाओ,तो दूजा झँकता है
लगता है रंग बड़े सस्ते है ,,,