Tuesday, February 19, 2013

पाप या पुण्य

आसमान के उड़ते परिंदे
को आँगन में उतार
लेती हूँ....
"दाना चुगा या नहीं "..
बस इतना ही पूछती हूँ
और दिल आराम से मुस्करा
जाता है........
पर अब ये बताओ

ये है क्या ....... पाप  या पुण्या..
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वो मेरे घर का पीछे वाला
दरवाज़ा खटखटाता है...
कहता है आकर मुझे
तुम्हारी इबादात करनी है
में चुपके से अंदर ले
लेती हूँ और रात मेरी
सुकून की नींद में
जाती है............

वो आँखो में मुझे रख
इबादात करता रहा रात भर....

पाप और पुण्या को कैसे तोलो
ये समझाओ .........
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नन्हा फरिश्ता जब रोता है
हाथ मेरा कुछ उधेड़ बुन
में रहता है ....
दिल, उसके रोने से छलनी
सा होता है ...
मगर ज़ुबान कह देती है
सता डाला है इसने मुझे....

माँ का दर्द .....पाप या पुण्य ...
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सड़क पर दौड़ती भीड़ में
वो तन्हा खड़ा ..........
आँखे नाम और सूखी
किसी की इंतज़ार में
भूख ने उसे आधा मारा
तो आधा मेने..

दस का नोट देकर
जीने का समान इकट्ठा
करने को कहा .......

ना जाने ये क्या है, मेरा
पाप या तुम्हारा पुण्य ....
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बहुत बड़ी इमारत है
दिन इनका खर्चा ही नहीं
होता ..
बिना करोड़ो के मुनाफ़े  के..

सिने में दिल धड़कता है
जिस्म में आत्मा भी है ...
जेब में समय टिकता नहीं

चाँद सिक्के आश्रम को देकर
वो अपना ज़मीर खरीदता है

ना जाने कैसे हिसाब रखते है
देकर और लेकर पाप पुण्या का
सौदा कर लेते है...
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ट्रेन सज गयी
नयी दुल्हन से
आधी रात को .
पिया मिलन से
ज़्यादा बेताबी है
चूल्‍हे में जलती आग
की...
अपने खोखले शरीर को
भर दिया गहनो से
चाँद  से सिक्के भरने के लिए
आटे के डिब्बे में

रोज़ प्रेम में नहाती है वो
पुण्या की गठरी लिए हुए

मगर ये पाप या पुण्य...

Saturday, December 15, 2012

बातचीत


मेरी मुहब्बत की तू न आज़माइश कर
माना तेरे साजदे में रोज़ आता नही तेरे 
मंदिर में बैठकर तेरे नाम काबा का नहीं पढ़ता ,
फिर भी तुझसे मेरी रूह जुड़ी है इस बात से 
तो, तू भी अंजान नहीं फिर क्यो नाराज़ है 
तो बात इतनी से है

"तेरे दुनिया के हर रंग में मुझे तू मिल जाता है 
 हर बार इसलिए तेरे मजिस्द मुझसे रह जाता है "










बातचीत बंदे की भगवान से ... जो बड़ी मुश्किल
में है की वो खुदा को हाजरी नहीं दे पाता....

प्रेम

प्रेम कभी सरल न रहा 
जितना डूबा उतना ही उलझा
देखो तो दो रूहों का खेल 
जिसे ना कोई जला सके 
ना भिगो सके , ऐसा
आत्मा का मेल.....

प्यार ने इसे जला दिया ,
खारे पाने ने धो दिया
कुंदन कर दिया, मगर 
इसे....

शेर

अब तेरी तस्वीर देख,दिल को कुछ नहीं होता
लगता है मुहब्बत ने घर बदल लिया ........

Saturday, December 1, 2012

जोगी

जोगी बन, वन वन फिरया 
न ही खुदा लाधया 
न ही माया ..
छडया घर, लभड वास्ते 
कोड़ा सोना भी गया हथ से 
पारस तो कदे मिलया ही नहीं 
आत्मा भी रोज़ धोअड़ जाता है ..
नादिया का पाडी पर मेला 
क्या धोवंगा अब 
न जाडे घडी चीजों 
पर मेल लगी है 
जो कभी धुप में सुखड डाले अंग 
तो धुप भी काली पड़ गयी 
मन खुला तो .. सब घर 
फेल गया .. ..

जोगी बेचारा ऐसा न 
घर मिलया ..
न जंगल ही ने, थले विच 
बिठाया ......

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Hindi translation ..


जोगी बन, वन वन घूमा 
न ही खुदा मिला 
न ही माया ..
छोड़ा घर, ढूढने के लिए 
झूठा सोना भी गया हथ से 

पारस तो कभी मिला ही नहीं 
आत्मा भी रोज़ धोने जाता है ..
नदी का पानी पर मेला 
क्या धोएगा अब 
न जाने कितनी चीजों 
पर मेल लगी है 
जो कभी धुप में सूखने डाले अंग 
तो धुप भी काली पड़ गयी 
मन खोला तो .. सब घर 
फेल गया .. ..

जोगी बेचारा ऐसा, न 
घर मिलया ..
न जंगल ही ने, अपने आंगन 
में बिठाया ......

Hindi translation ..