Saturday, December 3, 2011

बादल

बादलो पर पड़ा एक
कहानी का टुकड़ा...
जो आँखों में काफी
देर रहा .....
और मुहँ का जायके
के संग बार बार
खेलता  रहा.... 

बादलो पर पड़ा एक कहानी
एक  टुकड़ा ...

उम्र उस बादल के संग
चलती रही ...
नमकीन पानी
बरसता रहा ..
पर वो बदल का
बुनकर न आया

बादलो पर पड़ा एक कहानी
एक टुकड़ा ...

क्या पता था
की कहानी कुछ
यूँ  बदलेगी ..
में ज़मीन पर
रही..
वो असमान में
नया बादल बुनता
रहा ....

बादलो पर पड़ा एक कहानी
एक टुकड़ा ...








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