Monday, December 1, 2014

यूँ ही उलझी उलझी

तुम इतनी  न पिया करो 
बहक जाते हो
न जाने फिर कितनी
सच की उल्टियाँ  करते  हो। । 
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पिता को चाहिए सपूत
दादी को पोता
घर की रखवाली
का जिम्मा
पराये घर की लड़की
के हाथ  ।।

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तोंद बहुत बड़ी है
सोचता हूँ कुछ गरीबो में 
बाँट दूँ , पुण्य और नाम
दोनों एक साथ
गरीबो की तोंद क्यों
नहीं होती। । 

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