Wednesday, February 25, 2015

प्रेम

कुछ कोरे पन्ने  भरना
कुछ खयालो को बेख्याली कहना
कुछ बेवजह की बातों पर
बेवक़्त  मुस्कराना, कुछ
धड़कनो को थामना
और कुछ पतंगों सा
हवा में उड़ना

प्रेम के अजब  हाल हैं
न कोई रंग होना
फिर भी  रंगो से  होना
न कोई गंध
मगर  महका हर
जगह

रंगो से भर जाओ अबके होली  में
 टेसू महक रहा है गली गली में





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